आज अपनी कवितायों को नया आयाम देता हूँ
भ्रष्टाचार के खिलाफ नया नाम देता हूँ
इतना सोचकर
मैंने ब्लॉग बनायीं
संभ्रान्त्जनो से कवितायें आमंत्रित करवाई
पहले दिन कविता तो नहीं आई
पर, किसी कलमाड़ी का इ-मेल आया
लिखा था-
भ्रष्टाचार पर कवितायें मैं ही लिख सकता हूँ
क्यूंकि,
मैं इसकी रग-रग पहचानता हूँ
कौन किधर से अन्दर आया
और कब बाहर गया, सब जानता हूँ
मैं जनता के बीच भ्रष्टाचार का "बैटन" लेकर
क्रांति का अलख जगाऊंगा
पर इस बार 'टेक्सी' से नहीं,
आपके ब्लॉग के माध्यम से जाऊँगा!
अगला मेल राडिया का था
लिखा था- मैं भ्रष्टाचारियों पर
कवितायें लिखती नहीं, बस 'रिकॉर्ड' करवाती हूँ
भ्रष्ट लोग खुद हो जाते है
मैं तो बस 'बोलती' जाती हूँ!
मैं आउंगी इस ब्लॉग पे तो पत्र भी आयेंगे
हम मुहूर्त 'राजा' से और अंत 'टा-टा' से करवाएंगे!
[To be Continued]
1 comment:
are wah aap galti se hi bt achha likh lete ho.
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