Tuesday, June 13, 2023

मुंबई, बस एक शहर!

बढती ख्वाहिशों के साथ 
एक सिमटता शहर,
अधूरे सपनों के साथ 
एक जुडती डगर
मुंबई, बस एक शहर!

सुबह के सपने जब भीड़ में 
खो जाते है, 
स्क्वायर फीट के घरों में
दम तोड़ जाते है,
शाम के धुंधलके में उन्ही सपनों को
ढो कर हम घर आते है
इस इंतज़ार में-
कि है अभी एक और पहर 
मुंबई, बस एक शहर!

गगनचुम्बी इमारतें जब भी बौने होने का 
दंश दे जाते है
तब,
लोकल में रखे हर बैग में आतंक ढूँढ़ते 
कुछ मजबूत इरादे
हमारा हौसला बढ़ाते है,
और, बारिश की बूँदें यहाँ
काट जाती है सारे जहर 
मुंबई, बस एक शहर

यहाँ समंदर के किनारों पे
केवल कहानियाँ जन्म लेती है पर इतिहास 
कभी नहीं बनते
और, शुन्य की तरफ भागते ये पैर 
कभी नहीं थमते.
समझने की कोशिश में हूँ कि-
अकाल है समय का या आने वाला है 
प्रकृति का कोई कहर 
मुंबई, बस एक शहर!

3 comments:

Sumit said...

Nice summery of ur experience...
Keep up ur hobby !!

Hemant said...

you are good in this you know that...keep going..

AD07 said...

Good 1 bro..keep it up..lyk