'साथ देने' और 'साथ होने' में
अंतर है- शब्दों का या,
इससे आगे अर्थ का
'साथ देना' एहसान है
जो दूरियों को जतलाता है
'साथ होना' एहसास है
जो नजदीकियों से आता है
शब्दों के इसी भ्रमजाल में उलझा
मैं सोचता हूँ
कभी कभी एक शब्द
जो बुनियाद तय करता है
रिश्तों की,
और बेशक ज़िन्दगी की,
को हम समझ नहीं पाते
या
समझना नहीं चाहते
3 comments:
sahi hai..let the creative juices ooz out!!!
The black background is a bit straining on eyes..
Good one buddy... shayari mein uttyar nahi de sakta but its really nice
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