Tuesday, June 13, 2023

ज़िन्दगी, मौत और मैं

अतिरेक आनंद से भरी
ज़िन्दगी को
जब मौत ने अपने सामीप्य का एहसास कराया
तो पहली बार
ज़िन्दगी का वास्तविक अर्थ समझ में आया
जीवन कर्म का दूसरा नाम है
और मौत,
कर्मो के यथार्थ को बतलाती है
जीवन जीने की कला सिखलाती है

मौत ने अचानक
जब जीवन के आँगन में दस्तक दी,
तो शक हुआ
जीवन की परिपुर्नता पर
महसूस हुआ
ज़िन्दगी वास्तव में अभी अधूरी है
क्यूँकी हजारों के अपेक्षाओं की दीवार
इसी जीवन की नींव पर खड़ी है

और मौत
शायद यही एहसास दिलाना चाहती थी
चली गयी रणक्षेत्र पर छोड़कर
एक क्षणिक मौका देकर
ताकि
ऋण बोझ से मुक्त हो सकूँ
'ज़िन्दगी' के दो क्षण जी सकूँ
लेकिन,
समय की सीमाएं रेखित है
और इंतज़ार हो रहा है.............

2 comments:

Kumar Abhishek said...

Nice Poem !!
Death seems more meaningful than life. Death sometimes gives meaning to life. Really a nice creation!!

Subhasis said...

very true...it is probably death which makes life more meaningful..it is as if..the two sides of the coin don't give any picture individually but when u combine them...they complete the picture!!