Tuesday, June 13, 2023

यादों के झरोखे से !!!

आज महसूस हुआ है
पीछे छूटने का दर्द,
अभिलाषाओं और क्षण क्षण संवारी गयी यादों के
टूटने का दर्द,
दर्द इसलिए नहीं कि
मैंने कभी दर्द सहा नहीं
बल्कि इसलिए कि
दर्द ने दिल में आकर भी कुछ कहा नहीं

फर्क केवल इतना है,
पहले वो मेरे कल्पनाओं का हिस्सा था
अब शायद मेरी यादों का
दुःख ये नहीं की
वो खुश है
दुःख इस बात का है कि
इस ख़ुशी में हम नहीं है

रिश्तों की परिभाषाएं बदल गयी है
आयाम बदल गए है
नजदीकियों के अर्थ बदल गए है
बस,
किसी कोने में छूट गया
चिर-स्थिर सा खड़ा
नहीं बदल सका हूँ मैं

1 comment:

DIPAK said...

wow one of the best, kise yaad kar k likha dost